'पहले अस्पताल का बिल चुकाओ, फिर बेटे की लाश ले जाओ'...अस्पताल ने दुत्कारा तो बाप ने भीख मांगकर दिया पैसा
दातागंज के नगरिया खनू निवासी धर्मवीर सड़क हादसे में हो गया था घायल, बरेली के अस्पताल में हो गई थी मौत
परिवार वालों का आरोप- पैसा न देने पर बेटे की लाश को देने से मना कर दिया अस्पताल प्रबंधन ने
बदायूं। बदायूं। डॉक्टरों को 'धरती का भगवान' कहा जाता है लेकिन कई जगह यह भगवान अब 'शैतान' का रूप ले चुके हैं। कई दिन से अस्पताल में भर्ती बेटे की इलाज के दौरान मौत हो गई तो बाप ने उसकी लाश देने के लिए अस्पताल प्रबंधन से कहा। आरोप है कि अस्पताल ने उससे कहा कि 'पहले बिल चुका दो, तभी लाश देंगे।' मजबूर बाप ने गरीबी की दुहाई दी लेकिन अस्पताल नहीं पसीजा। इतना गरीब था कि उसे भीख मांगकर रकम जुटानी पड़ी। आरोप है कि इसके बाद ही अस्पताल प्रबंधन ने उसे बेटे की लाश ले जाने दी।
दातागंज तहसील के नगरिया के रहने वाला धर्मपाल उर्फ धर्मवीर एक हादसे में एक दिसंबर को गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया लेकिन सरकारी अस्पतालों की (अ) व्यवस्था के अनुसार, उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। धर्मवीर के परिवार वाले उसे बरेली के एक निजी अस्पताल ले गए। यहां करीब 14 दिन तक धर्मवीर का इलाज चला, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। बताते हैं कि अस्पताल ने इलाज के दौरान ही तीन लाख रुपये जमा करा लिए थे। बेटे की
मौत के बाद जब पिता रामलाल ने अस्पताल से बेटे की लाश मांगी तो अस्पताल ने उन्हें तीन लाख 10 हजार का बिल और थमा दिया। सोमनाथ ने गरीबी की दुहाई दी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन नहीं पसीजा। बताया जाता है कि इसके बाद धर्मवीर के पिता ने न केवल कई लोगों से उधार लिया बल्कि अपना घर तक गिरवी रख दिया था। इसके बाद भी केवल 2.80 लाख रुपये ही जुट सके तो उन्होंने एक बार फिर अस्पताल से बेटे का शव देने की मांग की। आरोप है कि इतने पर भी अस्पताल ने शव देने से इंकार कर दिया।
इसके बाद मायूस पिता बिना बेटे की लाश लिए गांव आ गया और सड़को पर भीख मांगनी शुरू कर दी। कुछ रकम कम पड़ने पर भी अस्पताल ने बेटे की लाश नहीं दी तो रामलाल ने पुलिस को बताया। बताया जाता है कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद रामलाल को धर्मवीर की लाश मिल पाई।
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ओमेगा अस्पताल का बताया जा रहा मामला
बदायूं। अमानवीयता का यह मामला बरेली के ओमेगा अस्पताल का बताया जा रहा है। हालांकि इसके बारे में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष नहीं मिल सका।



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