कादरचौक स्थित एक भवन में चलाया जा रहा स्कूल, जो यू डायस नंबर दर्ज उस पर मान्यता दिखा रहा परमानेंट क्लोज
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बदायूं। बदायूं में वैसे तो बेसिक शिक्षा विभाग की नाक के नीचे बिना मान्यता के तमाम स्कूल चल रहे हैं लेकिन कादरचौक में एक स्कूल ऐसा भी है जो साल भर बाद अपना नाम बदल देता है। विभागीय पोर्टल पर भी इसकी मान्यता परमानेंट क्लोज दिखा रहा है। ऐसे में यह मान्यताप्राप्त है, इस पर भी शक है।
जिले में तमाम स्कूल बगैर मान्यता के चल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हाल और बुरा है। हालांकि सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना मान्यता कोई भी स्कूल संचालित नहीं होन चाहिए, लेकिन तमाम जगह पर विभागीय मिलीभगत से ही इनका संचालन
किया जा रहा है। कुछ महीने पहले म्याऊं ब्लॉक के गांव कोठा में संचालित एसएनएस मेमोरियल उच्च माध्यमिक विद्यालय पर बीएसए द्वारा एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था लेकिन यह भी सच है कि कहीं विभाग की नजर में तो कहीं विभाग को गुमराह करके तमाम स्कूल संचालित हो रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला कादरचौक का है। यहां ककोड़ा रोड पर पीएसपी स्कूल के नाम से एक स्कूल चल रहा है। कुछ कमरों में चल रहे इस स्कूल में करीब 70-80 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। स्कूल में न तो मानक पूरे हैं और न ही भवन इस लायक है कि बच्चों को वहां बैठाया जा सके, लेकिन फिर भी धड़ल्ले से स्कूल संचालित किया जा रहा है।
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एक बैनर लगा दिया है गेट पर
बदायूं। स्कूल संचालक ने भवन के गेट पर एक बैनर टांग दिया है जिस पर जो यू-डायस नंबर दर्ज है, उस पर विभागीय वेबसाइट पर मान्यता परमानेंट क्लोज दिखा रहा है। लोगों का ये भी कहना है कि संचालक ने कोई वॉल पेंटिंग इसलिए नहीं कराई है ताकि यदि कोई जांच हो तो बैनर को तुरंत वहां से हटा दिया जाए।

अभी भी लगे हैं पिछले साल के होर्डिंग
बदायूं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल यही स्कूल एसवीएम पब्लिक स्कूल के नाम से चल रहा था। इस बार संचालक ने इसका नाम बदलकर पीएसपी स्कूल कर दिया। उससे भी पहले स्कूल का कुछ और नाम बताया जा रहा है। जब संचालक का पक्ष लेने के लिए बैनर पर पड़े एक नंबर पर संपर्क किया गया तो खुद को इस स्कूल का प्रधानाचार्य बताने वाले मुकेश कुमार नामक व्यक्ति मान्यता के संबंध में कोई संतोषजनक बात नहीं बता सके। हालांकि वह यह दावा करते रहे कि स्कूल 2005 की मान्यता से चल रहा है।
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