मरीज कर रहे आत्महत्या तो कभी उनके अंगों को कुतर रहे चूहे...आखिर कब सुधरेगी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था

मरीज कर रहे आत्महत्या तो कभी उनके अंगों को कुतर रहे चूहे...आखिर कब सुधरेगी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था

सांसद आदित्य यादव ने उपमुख्यमंत्री को पत्र भेजकर तथा एक्स पर लिखकर व्यवस्थाओं पर उठाया सवाल, निस्तारण की मांग

बदायूं। लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद आदित्य यादव ने राजकीय मेडिकल कॉलेज की दुर्दशा के संबंध में उपमुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। सांसद ने लिखा है कि हाल ही में उनके निरीक्षण एवं नागरिकों की शिकायतों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि राजकीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था अत्यन्त लचर एवं चिन्ताजनक स्थिति में है। मरीजों और उनके परिजनों को उचित चिकित्सा सुविधा के अभाव में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड रहा है। 

सांसद ने लिखा है कि जुलाई वर्ष-2023 में आईसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज के अंगो को चूहे के कुतरने का मामला सामने आया था। अक्टूबर-2024 में गले में संक्रमण की समस्या से परेशान 10 वर्ष की बच्ची को लेकर उसके परिजन मेडिकल कॉलेज आए लेकिन खेल में व्यस्त रहे डॉक्टरो ने इलाज में  लापरवाही बरती। मासूम

बच्ची तड़पती रही और उसकी जान चली गयी। दिसम्बर-2024 में जनपद सम्भल के तहसील गुन्नौर के एक मरीज ने इलाज के अभाव में मेडिकल कॉलेज की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। ऐसी बहुत सी घटनाएं इस मेडिकल कॉलेज में घटित हो चुकी हैं, जो कॉलेज प्रशासन की घोर लापरवाही का परिणाम हैं।

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इन समस्याओं का किया जिक्र

-ओपीडी काउंटरो की भारी कमी। यहां मरीजों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे उन्हें घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

-ऑपरेशन थिएटर एवं डायलिसिस पोर्ट की कमी। गम्भीर रोगियों के उपचार में अत्यधिक विलंब हो रहा है।

-डायलिसिस प्लांट बन्द। मरीजों को बाहर निजी संस्थानों पर निर्भर होना पडता है।

-वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं। आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान पर संकट बना रहता है।

-पीआईसीयू यूनिट बंद। बच्चों के उपचार में गम्भीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।

-आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं की भारी कमी। कई मरीजों के परिजन बाहर से महंगी दवाएं खरीदने को विवश है।

-डॉक्टरों द्वारा बाहर से दवा लिखना। मरीजों के परिजनों द्वारा बताया गया है कि डॉक्टर अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के बजाय बाहर से दवाएं लिखते हैं।

-वार्डाे एवं भवन की जर्जर स्थिति। बेड, छत एवं अन्य व्यवस्थाएं अत्यन्त दयनीय हाल में है।

-नर्सिग एवं पैरामेडिकल स्टाफ को महीनों से सैलरी न मिलना। इससे उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और मरीजों को सीधी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

-ऑक्सीजन प्लांट खराब होने से सिलेंडर बाहर से मंगवाया जा रहा है। इससे सुरक्षा और पारदर्शिता पर गम्भीर प्रश्न उठते है।

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ये की मांग

- तत्काल उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए।

- आवश्यक संसाधनों एवं चिकित्सकों की नियुक्ति शीघ्र की जाए।

- जीवरनरक्षक उपकरण एवं दवाओं की आपूर्ति नियमित की जाए।

- राजकीय मेडिकल कॉलेज की समग्र व्यवस्था को सुदृढ किया जाए।

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(मुख्य फोटो- फाइल)

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  • user by अनिल यादव

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