...और जब केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा से बोले सपा सांसद धर्मेंद्र- 'कोई काम ही नहीं करा रहे हैं आप'
लोकसभा में बीएल वर्मा को देखकर सांसद ने कसा तंज, कहा-'बदायूं की जनता आपको देख रही है, चुनाव में जवाब देगी'
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संवाददाता। लखनऊ और दिल्ली तक बदायूं होकर ट्रेन चलवाने की नेताओं द्वारा दी जा रही लॉलीपॉप के बीच आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा में केंद्रीय राज्यमंत्री बीएलवर्मा से कहा कि कोई काम हीं करा रहे हैं। बदायूं की जनता आपको देख रही है और जनता चुनाव में जवाब देगी कि आपके मंत्री बनने का कोई लाभ नहीं मिल पाया।

लोकसभा में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनके पूर्व के निर्वाचन क्षेत्र बदायूं को लेकर बदायूं से दिल्ली और बदायूं से लखनऊ के लिए ट्रेन चलाने को कई बार उन्होंने प्रश्न उठाए लेकिन बदायूं की जनता के हितों की अनदेखी कर भाजपा सरकार ने अभी तक ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं किया है।
मुलायम सिंह के बारे में कहा कि नेता जी ने एक बहुत ही गंभीर परियोजना के तहत मैनपुरी से एटा, कासगंज, बदायूं, संभल होते हुए गजरौला तक ट्रेन चलाने की मांग की थी और उसकी घोषणा भी तत्कालीन रेल मंत्री ने कर दी थी लेकिन उस योजना को भी वर्तमान भाजपा सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया। उनकी मांग है कि नेता जी की कर्मभूमि के इस एक बड़े हिस्से के हितों के दृष्टिगत तुरंत शुरू किया जाए।
इस दौरान धर्मेंद्र यादव ने केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा को संसद में बैठा देखकर कहा कि आप बदायूं से मंत्री बने लेकिन बदायूं की जनता के हितों के लिए कुछ नहीं करा रहे हैं। अभी तक बदायूं की क्षेत्रीय जनता के हितों के लिए कोई नई परियोजना नहीं शुरू कराई गई है। जनता देख रही है और आने वाले विधानसभा चुनाव में बदायूं की जनता भाजपा व उसके नेताओं से हिसाब अवश्य लेगी।
(देखिये वीडियो)-
कहा- बनारस तक ही सिमटकर रह गईं योजनाएं
- सांसद धर्मेंद्र यादव ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार घोषणाओं और भाषण की सरकार है। उत्तर प्रदेश के बारे में भाजपा नेता बढ़चढ़कर बाते करते हैं। देश के प्रधानमंत्री भी तीसरी बार उत्तर प्रदेश से ही चुनकर संसद में आए हैं परंतु इस रेल बजट को देखकर उत्तर प्रदेश की जनता बहुत ही हताश और निराश है। जब से अवधेश प्रसाद अयोध्या से जीते हैं तब से उत्तर प्रदेश के बजट में केंद्र की भाजपा सरकार लगातार कटौती करती जा रही है। कुछ परियोजनाएं आईं हैं लेकिन वह प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र बनारस तक ही सिमटकर रह गईं हैं।





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