गांवों से तहसील और ब्लॉक का सफर आसान होने की उम्मीद, मिनी बसों के संचालन की तैयारी

गांवों से तहसील और ब्लॉक का सफर आसान होने की उम्मीद, मिनी बसों के संचालन की तैयारी

निजी बस संचालकों के साथ बातचीत करके तैयार की जा रही कार्ययोजना

सबकी बात न्यूज

सम्भल। गांव के लोगों को अपनी तहसील और ब्लॉक तक पहुंचने के लिए डग्गामारों का सहारा नहीं लेना पड़े इसके लिए इन रूटों पर मिनी बसों के संचालन की तैयारी की जा रही है। परिवहन निगम और परिवहन विभाग मिलकर कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत निजी बस संचालकों से बात की गई है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो गांवों से तहसील और ब्लॉक मुख्यालय को जोड़ने वाले रूटों पर मिनी बसों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। 

फिलहाल शहरी क्षेत्रों में ही रोडवेज बसों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों को भी इससे जोड़ने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना शुरू की गई है, जिसके तहत सभी ग्राम पंचायतों को तहसील व मुख्यालय से जोड़ा जाएगा और उसके बाद रोडवेज बसें का संचालन इन मार्गों पर शुरू हो जाएगा। इससे जहां एक ओर


- सम्भल में निजी बस संचालकों से बात करते अधिकारी (फाइल फोटो)- 

डग्गामारी पर लगाम लगेगी वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। इसके लिए परिवहन निगम और परिवहन विभाग की ओर से मिलकर कार्ययोजना तैयार करते हुए निजी बस संचालकों से बात की जा रही है। सम्भल के एआरटीओ कार्यालय में इसके लिए पिछले दिनों एक बैठक भी की गई है जिसमें परिवहन विभाग और परिवहन निगम के अधिकारियों ने निजी बस संचालकों के साथ बात की। 

--------

15 से 28 सीटर होंगी बसें

सम्भल। इस योजना के तहत जो बसें लगाई जाएंगी वह 15 से 28 सीटर वाली होंगी। बसों के पुराने होने की स्थिति में पंजीयन तिथि से अधिकतम आठ वर्ष तक की आयु के वाहन शामिल किए जा सकेंगे। वहीं वाहन के निर्माण और पंजीयन में एक वर्ष से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। बताते हैं कि इसके लिए निजी बस संचालकों को परमिट की बाध्यता के साथ ही कई छूट भी दी जा रही हैं। योजना में निजी बस संचालकों का परिवहन निगम के साथ अनुबंध होगा, जो दस वर्ष के लिए रहेगा। अनुबंध की समय सीमा पूर्ण होने के बाद उसे पांच वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है। 

------

दो हजार में होगा पंजीकरण

बदायूं। योजना के लिए निजी बस संचालकों को दो हजार रुपये देकर पंजीकरण कराना होगा। सिक्योरिटी के रूप में पांच हजार रुपये जमा होंगे। मासिक किराये के रूप में डेढ़ हजार रुपये प्रति माह जमा करना होगा। इन बसों के फेरे, समय का निर्धारण करने का अधिकार बस संचालक को होगा। चालक, परिचालक, ईंधन, बीमा, रोड टैक्स, फिटनेस व रखरखाव का खर्च भी वाहन स्वामी को वहन करना होगा। बस संचालकों को बढ़ावा देने के लिए परमिट की बाध्यता की शत प्रतिशत छूट दी गई है। इस संबंध में एआरटीओ सम्भल का कहना है कि योजना के बारे में निजी बस संचालकों को प्रेरित किया गया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा बसों का संचालन हो सके और ग्रामीण जनता को उसका लाभ मिल सके। 

Leave a Reply

Cancel Reply

Your email address will not be published.

Follow US

VOTE FOR CHAMPION

Top Categories

Recent Comment

  • user by Anonymous

    दुखद

    quoto
  • user by Anonymous

    Haraami docter

    quoto
  • user by Anonymous

    बदायूं के भाजपाई चोर हैं

    quoto